Tuesday, April 16, 2024
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कम लागत में शुरु करे धनिया की खेती किसान कमाएंगे अधिक मुनाफा, जाने इस खेती से होने वाले बंपर फायदे

आप भी जानते होंगे धनिया की खेती के बारे में यह एक मसलो की फसल होती है। इसकी खूबसूरती और स्वाद को देखकर सब्जी का टेस्ट ही बदल जाता है। यही नहीं ताजा धनिये की पत्तियां हर सब्जी में पकने बाद डाली जाती है जो सब्जी के स्वाद को बहुत ज्यादा लाजवाब बना देता है। धनिये की खेती किसान बहुत से तरीके से करते है। वहीं इसे घर के गमले में भी उगाया जा सकता है। कई घरों में बगीचे में लोग धनिया उगाते है। इस तरह देखा जाए तो इसका उत्पादन छोटे लेवल से बढे लेवल तक भी किया जा सकता है।

धनिया की खेती से जुड़ी जानकारी

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धनिये की खेती करने से पहले हमें इसकी उन्नत किस्मों किस्मों के बारे में जानना बहुत ज्यादा जरूरी होता ही। जिससे इस खेती से आप अधिक ज्यादा लाभ उठा सकते है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को इसकी उन्नत किस्म के बारे में जानकारी हो। हम आपको इस खेती के बारे में बतायेगे। साथ ही इसकी उत्तम किस्मो के बारे में भी जानकारी देंगे। तो जानते है इसकी खेती के बारे में ,

भारत में कहा होता है इसका ज्यादा उत्पादन

भारत में धनिया की खेती सबसे ज्यादा पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कनार्टक और उत्तर प्रदेश में अधिक मात्रा में की जाती है। इनमें मध्यप्रदेश में धनिया की खेती 1,16,607 हेक्टेयर में होती है जिससे लगभग 1,84,702 टन की पैदावार की जति है भारत से दूसरे देशों में धनिया निर्यात किया जाता है।

धनिया की विभिन्न किस्में

धनिया की खेती करने के लिए उसकी किस्मों में हिसार सुगंध, आर सी आर 41, कुंभराज, आर सी आर 435, आर सी आर 436, आर सी आर 446, जी सी 2 (गुजरात धनिया 2), आरसीआर 684, पंत हरितमा, सिम्पो एस 33, जे डी-1, एसी आर 1, सी एस 6, जे डी-1, आर सी आर 480, आर सी आर 728 शामिल हैं।

धनिया की बुआई करने का उचित समय

धनिया की बुवाई जून-जुलाई, बारिश के मौसम में की जा सकती है लेकिन इसकी बुवाई का उचित समय अक्टूबर से नंबवर का भी होता है। आप इस समय भी इसकी खेती से अच्छे पैसे कमा सकते है।

धनिया की खेती में खाद उरवर्क का प्रयोग

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धनिया की खेती करने के लिए गोबर खाद 20 टन/हेक्टेयर के साथ 40 कि.ग्रा. नत्रजन, 30 कि.ग्रा. स्फुर, 20 कि.ग्रा. पोटाश तथा 20 कि.ग्रा. सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से तथा 60 कि.ग्रा. नत्रजन, 40 कि.ग्रा. स्फुर, 20 कि.ग्रा.पोटाश तथा 20 कि.ग्रा. सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचित फसल के किये इस्तेमाल किया जाता है।

धनिया की खेती से लाभ

धनिया प्रसंस्करण द्वारा 97 प्रतिशत धनिया बीजों की पिसाई कर इसका पाउडर बनाया जाता है. जो मसाले के रूप में उपयोग में लाया जाता है। शेष तीन प्रतिशत धनिया बीज, धनिया दाल एवं वाष्पशील तेल बनाने में इसका इतेमाल किया जाता है। धनिया की ग्रेडिंग करने में 15-16 रुपए प्रति किलो का खर्चा करना होता है। इसका बाजार में भाव अच्छा खासा रहता है। इसलिए किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते है।

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