Tuesday, April 16, 2024
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किसान को बना सकती है मालामाल मटर की यह फसल, जाने इसकी खेती से बंपर फायदे और उन्नत किस्मों के बारे में

आप भी मटर की खेती के बारे में जानते ही होंगे। यह खेती किसानो के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होती है। इस खेती को कर किसान लाखो का मुनाफा कमा सकता है। मटर देश की शीतकालीन सब्जियों में एक है. दलहनी सब्जियों में मटर का बहुत बढ़ा स्थान माना जाता है। मटर की खेती से जहां एक ओर कम समय में अधिक पैदावार मिलती है मटर का उपयोग सब्जी के साथ–साथ दलहन के रूप में भी बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है। अगेती मटर की खेती से कम समय में किसान अच्छा मुनाफा कमा सकता है।

मटर की यह किस्में 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे खेत जल्दी खाली होकर हम दूसरी फसल निकल सकते ही आइए जानते हैं भारत की पांच मशहूर मटर की किस्मों के बारे में जिसकी खेती बेहतर मुनाफा देता है। और किसान इसकी खेती से लाखो रुपय कमा सकता है।

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मटर की खेती में जलवायु

यह रबी की फसल होती है। इस फसल का उत्पादन ठंडे मौसम में अच्छे से किया जा सकता है। अंकुरण के लिये 22 डिग्री सेल्सियस तापक्रम की आवश्यकता रहती है। पुष्पन अवस्था में पाला फसल को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है। फसल की वृद्धि की लिये 13 से 18 सेल्सियस तापक्रम उत्तम है। इस तरह के तापमान में इस फसल की पैदावार अच्छी की जा सकती है।

इस फसल के लिए मिट्टी

इस फसल के लिए सबसे बेहतर मिट्टी दोमट मिट्टी मानी जाती है। इस मिट्टी में यह फसल बहुत अच्छी होती है।

बुआई समय

इस फसल की बुआई सितम्बर से अक्टूबर में बिच कर दी जारी है यह महीने इस फसल की बुआई करने के लिए बहुत ज्यादा बेहतर होते है। समय पर इस फसल की खेती बहुत ज्यादा लाभकारी होती है।

बीज को कैसे बोना चाहिए

बीजो को बोन के लिए सबसे पहले पंक्ति की दूरी 30 सेमी एवं पौधे से पौधे की दूरी 5-6 सेमी की दुरी पर रखना चाहिए। मध्यम एवं देर से पकने वाली किस्मों में, 45 सेमी पंक्ति से पंक्ति तथा पौधे से पौधे की दूरी 8-10 सरखे। इसकी गहराई 5 से 7 सेमी तक होना चाहिए।

कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग

इस खेती में अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद 20 टन प्रति हे. की दर से खेत की तैयारी के समय में अच्छी तरह से मिला देना चाहिए। 40 किग्रा यूरिया, 375 सिंग सुपर फास्फेट किग्रा एवं 50 म्यूरेट ऑफ पोटाश बुवाई के समय यह डाले ,इससे आपकी फसल में अच्छीपैदावार होगी।

मटर की उन्नत किस्में

पूसा प्रगति – फलियों की लंबाई 9-10 सेमी एवं प्रति फली 8-10 दाने पाये जाते है। पहली तुड़ाई 60-65 दिन में हो जाती है एवं पाउडरी मिल्डयु प्रतिरोधी किस्म है। इसकी उपज 70 क्विंटल हरी फलिया प्रति हेक्टेयर है। पीएलएम-3 – फलियों की लम्बाई 8-10 सेमी एवं फलियों में 8-10 दाने पाये जाते है। पहली तुड़ाई 60-65 दिन में हो जाती है। इसकी उपज 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हरी फलियां है। यह सभी मटर की किस्मे होती है।

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मटर की खेती से मुनाफा

मटर की खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। मटर की खेती से जहां एक ओर कम समय में पैदावार प्राप्त की जा सकती है वहीं ये भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायक होती है। फसल चक्र के अनुसार यदि इसकी खेती की जाए तो इससे भूमि उपजाऊ बन जाती है। मटर में मौजूद राइजोबियम जीवाणु भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक होते ही। मटर की खेती से आप भी लाखों रुपय कमा सकते है और इस खेती का अच्छा लाभ उठा सकते है।

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