Wednesday, June 12, 2024
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कम लागत में मटर की खेती से किसान होंगे मालामाल, जाने इसकी खेती और उन्नत किस्मों के बारे में

भारत में मटर की खेती बढे पैमाने पर की जाती है. किसान इसकी खेती कर के अच्छा पैसा कमा लेता है। इसकी डिमांड मार्केट में हमेशा रहती है। किसम इसकी खेती 7.9 लाख हेक्टेयर भूमि में मटर को उगाया जाता है। इसका उत्पादन सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार राज्यों में होता है. यह एक रबी की फसल होती है। किसान इसकी खेती से अच्छी कमाई कर सकता है।

मटर की खेती

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मटर की खेती के लिए ठंडा मौसम बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। और महाराष्ट्र में इसकी खेती बढे पैमाने पर की जाती है। मटर का उपयोग आहार में सब्जी के रूप में किया जाता है.इसकी अगेती खेती करके आप अच्छी खासी कमाई कर सकते है। महाराष्ट्र में अक्टूबर की शुरुआत या नवंबर की शुरुआत में इनको लगा दिये जाते है। दलहनी सब्जियों में मटर का अपना एक बहुत बढ़ा स्थान है। मटर की खेती से जहां एक ओर कम समय में अच्छी पैदावार की जाती है। इस खेती को करने की सबसे खास बात यह है की यह फसल बहुत जल्दी तैयार हो जाती है। इसके साथ आप दूसरे फसल की खेती भी कर सकते है। मटर कार्बो प्रोटीन के साथ-साथ फास्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन ए, बी और सी जैसे खनिजों लवणों की मात्रा भी भरपूर पायी जाती है।

इस खेती में जलवायु और मिट्टी

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मटर ठंड में होने वाली रबी की फसल होती है। यदि औसत तापमान 10 से 18 डिग्री सेल्सियस है, तो फसल की लम्बाई अच्छी तरह से बढ़तीउ है। इसकी खेती के लिए मटियार दोमट और दोमट भूमि सबसे ज्यादा बेहतर होती है। जिसका पीएच मान 6-7.5 होना जरुरी होता हैं. इसकी खेती के लिए अम्लीय भूमि सब्जी वाली मटर की खेती के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं मानी जाती है.लेकिन हल्की मिट्टी में फसल जल्दी तैयार की जा सकती है। इस तरह इस फसल के लिए यह मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।

इस खेती के लिए मौसम

महाराष्ट्र में, यह फसल खरीफ मौसम में जून-जुलाई के साथ-साथ ठंड के मौसम में भी इसकी खेती की जाती है। इसलिए इसे अक्टूबर की शुरुआत या नवंबर की शुरुआत में लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके लिए ठंड का मौसम ही बेहतर होता है।

मटर की उन्नत किस्में

प्रारंभिक नस्लें अर्ली बैगर, अर्केल, असोजी, उल्का मध्यकालीन नस्लें बोनविले, परफेक्शन न्यू लाइन देर से आने वाली किस्में एन. पी। 29, थॉमस लैक्सटन आदि मटर की किस्में होती है।

खाद व उर्वरक का इस्तेमाल कैसे करे

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मटर में सामान्यत 20 किग्रा, नाइट्रोजन एवं 60 किग्रा. फास्फोरस बुआई के समय देना सही रहता है। इसके लिए 100-125 किग्रा. डाईअमोनियम फास्फेट (डी, ए,पी) प्रति हेक्टेयर दिया जा सकता है. पोटेशियम की कमी वाले क्षेत्रों में 20 कि.ग्रा. पोटाश दिया जाता है। जिन क्षेत्रों में गंधक की कमी हो वहां बुआई के समय गंधक भी देना जरुरी होता है। इस तरह से आप खाद का स्तेमाल कर सकते है।

कितना होगा मुनाफा

मार्केट में मटर के भाव हमेशा अच्छे दामों पर रहते है। सामान्यत मटर के भाव 20-40 रुपए प्रति किलो तो रहते ही है। लेकिन भाव ज्यादा बढ़ जाये तो आप इस खेती से लाखो रूपए की भी कमाई कर सकते है। मटर, गेहूं और जौ के साथ अंत फसल के रूप में भी बोई जाती है. ऐसे में किसान इस फसल से अच्छी खासी कमाई कर सकता है। और इस फसल का भरपूर फायदा उठा सकता है।

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