Monday, April 22, 2024
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ब्लड कैंसर के लिए राम बान इलाज , कब होगी भारत में लॉन्च, और कितना होगा बजट

ब्लड कैंसर के लिए राम बान इलाज , कब होगी भारत में लॉन्च, और कितना होगा बजट, कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो की बहुत खतरनाक है लोगो की जान बचने के लिए कैंसर पर हमेशा नए-नए शोध होते रहते हैं । इसके साथ आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं के नाम भी हैं जिन्होंने एक नई थेरेपी का उपयोग करके रक्त कैंसर का इलाज खोजा है। चलिए जानते है क्या कहते है शोधकर्ता।

कैंसर रोगियों के इलाज

रक्त कैंसर सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है, लेकिन अब, सरकारी मंजूरी मिलने के लगभग एक महीने बाद, रक्त कैंसर को रोकने वाली एक काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (सीएआर) टी-सेल थेरेपी अस्पतालों में आ गई है। अगले वर्ष के भीतर 1,000 रक्त कैंसर रोगियों के इलाज के लक्ष्य के साथ देश के लगभग 15 अस्पतालों में उपचार शुरू किया गया है। उत्तर भारत में मैक्स हेल्थकेयर के साथ इस तकनीक पर सहमति बनी है। यहां भी दो मरीजों को इस थेरेपी से इलाज के लिए पंजीकृत किया गया है।

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सीएआर-टी थेरेपी

कैसे होगा इलाज? यह तकनीक कैंसर रोगियों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर आधारित है। सीएआर-टी थेरेपी में, रोगी के शरीर से प्रतिरक्षा कोशिकाओं को हटा दिया जाता है और फिर प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है। सरल शब्दों में, रोगी की कोशिकाओं को कैंसर से लड़ने के लिए इंजीनियर किया जाता है। जब ये कोशिकाएं कैंसर से लड़ने में सक्षम हो जाती हैं, तो इन्हें मरीज के शरीर में दोबारा डाल दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 80 प्रतिशत मामलों में वे इस उपचार से सफल रहे और कैंसर को मात देने में सफल रहे। बॉम्बे में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने प्रौद्योगिकी विकसित की। मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल सहित कई प्रमुख स्थानीय चिकित्सा संस्थानों द्वारा इस नैदानिक परीक्षण में इसे सुरक्षित और 80% प्रभावी माना गया।

सीएआर-टी सेल थेरेपी को हरी झंडी मिल गई है

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इस क्लिनिकल परीक्षण की सफलता के बाद, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 12 अक्टूबर को देश भर के अन्य अस्पतालों में उपयोग के लिए इस थेरेपी को मंजूरी दे दी। देश में थेरेपी के उपयोग के लिए 15 अस्पतालों के साथ अनुबंध किया गया है।

यह तकनीक 5 देशों में उपलब्ध है

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सबसे पहले CAR-T सेल थेरेपी 2009 और 2010 के बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लाया था हालाँकि, परीक्षण को 2018 में सरकारी मंजूरी मिली और भारतीय वैज्ञानिकों जो है उन लोगो ने 2018 में इसपर काम करना चालू किया था। अमेरिका ही नहीं बल्कि यह तकनीक अभी भी भारत, स्पेन, जर्मनी और चीन में उपयोग की जाती है। इस इलाज की लागत लगभग 30-35,000 रुपये है। लेकिन जल्द ही यह सस्ता हो जाएगा. इस थेरेपी की मदद से ब्लड कैंसर के मरीजों को काफी राहत मिलेगी. और उनकी जान बच पाई है

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